विश्वविद्यालय में देश का 77 वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। विष्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डा.) मनमोहन सिंह चौहान ने प्रातः 9ः00 बजे विष्वविद्यालय के अधिकारियों की उपस्थिति में कुलपति आवास तराई भवन पर ध्वजारोहण किया तदोपरान्त 9ः25 बजे गांधी मैदान में भारी संख्या में उपस्थित विद्यार्थियों, षिक्षकों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों एव कर्मचारियों के मध्य ध्वजारोहण किया और देष की एकता व बंधुता को बनाये रखने का संकल्प दिलाया। उन्होंने असंख्य शहीदों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद किया जिनके बलिदानों की नींव पर भारत स्वतंत्र रूप से खड़ा है।
कुलपति ने बताया कि सत्र 2025-26 में विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में कुल 5039 छात्र-छात्राओं का पंजीकरण हुआ है। अब तक विश्वविद्यालय में 36 दीक्षांत समारोह आयोजित हो चुके हैं तथा 17 फरवरी को 37वां दीक्षांत समारोह प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय से अब तक 45,284 विद्यार्थी उपाधि प्राप्त कर चुके हैं, जो देश के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। उन्होंने विष्वविद्यालय की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय में डा. भीमराव अंबेडकर चेयर की स्थापना एक बड़ी उपलब्धि है।
साथ ही प्रौद्योगिक महाविद्यालय में सेमीकंडक्टर लैब की स्थापना की गई है, जो आईआईटी के अतिरिक्त किसी कृषि विष्वविद्यालय में पहली है। इससे विद्यार्थियों को उन्नत प्रशिक्षण एवं बेहतर प्लेसमेंट के अवसर मिलेंगे। पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में हो रहे अनुसंधान की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट के अंतर्गत किसान चौपाल, प्रशिक्षण कार्यक्रम, आईवीएफ तकनीक तथा देसी गाय की क्लोनिंग पर कार्य किया जा रहा है, जिससे प्रदेश एवं देश के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी। छात्र गतिविधियों पर बोलते हुए कुलपति ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खेल, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी से ही सर्वांगीण विकास संभव है। उन्होंने संसद भवन में आयोजित कार्यक्रमों में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने वाले विद्यार्थियों तथा एनसीसी कैडेट प्रिंस सिंह राणा को स्वर्ण पदक प्राप्त करने पर बधाई दी। प्लेसमेंट की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि लगभग 1100 विद्यार्थियों ने प्लेसमेंट के लिए आवेदन किया, जिनमें से 666 विद्यार्थियों का 5 से 15 लाख रुपये के पैकेज पर चयन हुआ है। उन्होंने इसे विष्वविद्यालय और प्लेसमेंट सेल की बड़ी सफलता बताया। कुलपति ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से विश्वविद्यालय की तकनीकों को किसानों तक पहुंचाया जा रहा है तथा मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) और प्रोसेसिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके। अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में विश्व रैंकिंग में और बेहतर स्थान प्राप्त करेगा तथा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने एक बार फिर सभी को 77 वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए “जय हिंद” के उद्घोष के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।
तराई भवन एवं गांधी पार्क के अतिरिक्त विभिन्न शोध केन्द्रों पर उनके प्रभारी अधिकारियों तथा विश्वविद्यालय फार्म पर मुख्य महाप्रबंधक (फार्म) डा. जयंत सिंह द्वारा ध्वजारोहण किया गया।
इस अवसर पर शारीरिक शिक्षा अनुभाग में कुलपति इलेवन एवं रजिस्ट्रार इलेवन के मध्य क्रिकेट मैच खेला गया, जिसमें कुलपति इलेवन ने रजिस्ट्रार इलेवन को हराया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, निदेशक आदि उपस्थित थे।

विश्वास और धैर्य ही विजेता बनाता है- डा. केसरवानी
वर्धा, महाराष्ट्र में आयोजित 50वीं अंतर विश्वविद्यालय कमलनयन बजाज वक्तृत्व प्रतियोगिता में पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के छात्र स्निग्ध अवस्थी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सर्वश्रेष्ठ वक्ता पुरस्कार का सम्मान प्राप्त किया। इस स्वर्ण जयंती संस्करण में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिभाशाली वक्ताओं ने भाग लिया। स्निग्ध अवस्थी ने अपने प्रभावशाली विचारों, आत्मविश्वास पूर्ण प्रस्तुति और स्पष्ट अभिव्यक्ति से सभी को प्रभावित किया। यह प्रतियोगिता युवाओं को सामाजिक एवं बौद्धिक विषयों पर अपने विचार व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन का निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डा.) मनमोहन सिंह चौहान, अधिष्ठाता, छात्र कल्याण डा. ए.एस. जीना तथा स्टाफ काउंसलर डा. अमित केसरवानी द्वारा समय-समय पर मिले प्रोत्साहन, मार्गदर्शन और समर्थन ने स्निग्ध अवस्थी को इस स्तर तक पहुँचने में प्रेरित किया। डा. केसरवानी ने निरंतर प्रयास और कुशल मार्गदर्शन को ही सफलता की एकमात्र कुंजी बताया। स्निग्ध अवस्थी की इस उपलब्धि से न केवल उनकी प्रतिभा उजागर हुई है, बल्कि पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय का नाम भी राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ है।


