शासन के पूर्व सचिव, विनोद प्रसाद रतूड़ी (IAS) ने एक बार फिर अपने व्यवहार से प्रशासनिक मर्यादा और नियमों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पेश की। हाल ही में, स्थाई राजधानी ग़ैरसैण समिति के आंदोलन हेतु ‘आंदोलन स्थल’ की अनुमति प्राप्त करने के लिए वह स्वयं जिला प्रशासन के पास पहुँचे।
आमतौर पर उच्च पदों से सेवानिवृत्त अधिकारी अपने रसूख का उपयोग करते हैं, किंतु श्री रतूड़ी ने लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान करते हुए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया। उन्होंने कार्यक्रम की अनुमति हेतु मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी से शिष्टाचार भेंट की और विधिवत अनुमति की प्रक्रिया को पूर्ण किया।
श्री विनोद प्रसाद रतूड़ी जी का प्रोटोकॉल और व्यक्तित्व, शासन के सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहने के बावजूद, जमीन से जुड़ाव और कानून सम्मत प्रक्रिया पर अडिग रहना उनकी पहचान है। सीडीओ और एडीएम जैसे अधिकारियों के पास स्वयं जाकर अनुमति मांगना उनके अहंकार-शून्य व्यक्तित्व को दर्शाता है। रिटायरमेंट के बाद भी सामाजिक कार्यों और आंदोलनों के लिए सक्रिय रहना यह सिद्ध करता है कि वह उत्तराखंड के विकास और जन-मुद्दों के प्रति आज भी उतने ही गंभीर हैं जितने सेवाकाल में थे।
श्री रतूड़ी का यह कदम वर्तमान अधिकारियों और युवा पीढ़ी के लिए एक सीख है कि पद से बड़ा नियम और लोकतंत्र होता है।
उनके सम्मान में कर्मचारियों से लेकर मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी तक अपनी कुर्सियों से स्वतः खड़े हो गए। पद से मुक्त होने के बाद भी उनका यह ‘प्रोटोकॉल’ उनकी साख का प्रमाण है।

