पंतनगर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित ‘डा. डी. सुंदरेसन स्मृति व्याख्यान’ के अंतर्गत गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान द्वारा ‘सहायक पशु प्रजनन प्रौद्योगिकियाँ: विकसित भारत 2047 की ओर एक मार्गदर्शिका’ विषय पर विशिष्ट व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।
अपने उद्बोधन में कुलपति प्रोफेसर चौहान ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में पशुधन जैव-प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से सहायक पशु प्रजनन प्रौद्योगिकियाँ (एआरटी) जैसे कृत्रिम गर्भाधान (एआई), ओवम पिक-अप – इन विट्रो फर्टिलाइजेशन, एम्ब्रियो ट्रांसफर, जीनोमिक चयन एवं क्लोनिंग तकनीकों के माध्यम से दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि, जलवायु-अनुकूल नस्लों के विकास तथा स्वदेशी नस्लों के संरक्षण के लिए एक समग्र रणनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

डा. डी. सुंदरेसन स्मृति व्याख्यान’ के अंतर्गत व्याख्यान प्रस्तुत करते कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान
उन्होंने कहा कि भविष्य का डेरी विकास केवल पशुधन संख्या में वृद्धि से संभव नहीं है, बल्कि उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी-आधारित प्रजनन प्रबंधन, डेटा-संचालित निर्णय प्रणाली तथा नवाचार-आधारित अनुसंधान से ही सतत् प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को किसानों तक प्रभावी रूप से पहुँचाने के लिए समन्वित प्रयास करें।
कार्यक्रम में संस्थान के कुलपति एवं निदेशक डा. धीर सिंह सहित वरिष्ठ वैज्ञानिकों, अधिकारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। उपस्थित प्रतिभागियों ने कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान के दूरदर्शी विचारों एवं राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत कार्य-योजना की सराहना की। यह ऑरेशन विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में पशुधन प्रजनन प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन सिद्ध हुआ।
