कृषि महाविद्यालय पंतनगर के पादप रोग प्रबन्धन पर 21-दिवसीय विन्टर स्कूल का समापन

गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय,पंतनगर में कृषि महाविद्यालय के पादप रोग विज्ञान विभाग में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित 21-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘पादप स्वास्थ्य प्रबंधन हेतु नवीन तकनीकियां एवं परंपरागत दृष्टिकोण’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन समारोह विभाग के आर.एस. सिंह सभागार में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम 10 से 30 मार्च 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों से आये प्रतिभागियों को आधुनिक एवं पारंपरिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।

मुख्य अतिथि डा. के.पी. सिंह ने कृषि क्षेत्र में निरंतर नवाचार और अनुसंधान की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वैज्ञानिकों को किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप शोध कार्य करना चाहिए। उन्होंने पारंपरिक कृषि पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों के समन्वय तथा रोगों की पहचान में नई प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर दिया।

कार्यशाला में वर्चुअल माध्यम में प्रतिभाग करते संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अधिष्ठाता कृषि डा. सुभाष चन्द्रा ने पादप रोगों, विशेषकर भूमि जनित रोगों के प्रबंधन की जटिलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने पारिस्थितिकी संतुलन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि जैविक नियंत्रकों का सिंचाई जल में मिश्रण (बायोफर्टिगेशन) पॉलीहाउस फसलों के लिए अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे अपने शोधों को किसानों के खेतों तक पहुंचाने तथा किसानों के अनुभवों को आंकड़ों के रूप में संकलित करने पर विशेष ध्यान दें।

कार्यक्रम के दौरान विभागाध्यक्ष एवं निदेशक, उच्च संकाय प्रशिक्षण केन्द्र डा. योगेन्द्र सिंह ने प्रशिक्षण की विस्तृत आख्या प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम की प्रमुख गतिविधियों से अवगत कराया।

कार्यक्रम में जानकारी देते विभागाध्यक्ष एवं निदेशक, उच्च संकाय प्रशिक्षण केन्द्र

इस अवसर पर डा. के.पी. सिंह, डा. सुभाष चन्द्रा एवं पाठ्यक्रम निदेशक डा. योगेन्द्र सिंह द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में देश के छह राज्यों से कुल 12 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में डा. अरुणिमा, सहायक प्राध्यापक, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़) एवं डा. विपिन चंद्रा, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, नवसारी (गुजरात) ने अपने अनुभव साझा करते हुए कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया।

कार्यक्रम में विभाग के वैज्ञानिक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम की समन्वयक डा. शैलबाला शर्मा ने स्वागत प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जबकि सह-समन्वयक डा. शिल्पी रावत ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

Jago Pahad Desk

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