अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना-कृषिरत महिलाएं, गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत तीन-दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन आईसीएआर-केंद्रीय महिला कृषि संस्थान, भुवनेश्वर के सहयोग से भीमपुरी गांव, कोटाबाग ब्लॉक में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग की कृषक महिलाओं के कौशल विकास एवं आजीविका संवर्धन को बढ़ावा देना था।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस पर प्रतिभागियों को हर्बल गुलाल एवं धूप निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। सुंदरम स्वयं सहायता समूह, जवाहर नगर की सचिव श्रीमती राधा पांडे ने गुग्गल, लौंग, गोबर, लकड़ी का बुरादा एवं सूखे फूलों आदि से कम लागत में सतत् तकनीक द्वारा धूप निर्माण की विधि समझाई। साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी कुमारी पूजा गोस्वामी एवं एएनएम कुमारी सुमित्रा आर्या ने स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विषय पर व्याख्यान देते हुए ग्रामीण महिलाओं को आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान की।

द्वितीय दिवस पर मशरूम उत्पादन विषयक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस अवसर पर डा. एस.के. मिश्रा, प्राध्यापक, पंतनगर विश्वविद्यालय ने मशरूम की वैज्ञानिक खेती, आवश्यक संसाधन, उत्पादन प्रक्रिया तथा विपणन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। इसके अतिरिक्त नैनीताल डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के शाखा प्रबंधक श्री राहुल कुमार ने ग्रामीण महिलाओं एवं उद्यमियों के लिए संचालित बैंक योजनाओं की जानकारी देते हुए स्वरोजगार एवं वित्तीय सहायता के अवसरों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंतिम दिवस पर डा. मनीषा गहलौत, प्राध्यापक, पंतनगर विश्वविद्यालय ने प्राकृतिक रंगाई का प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रतिभागियों को प्राकृतिक स्रोतों से रंग तैयार करने तथा वस्त्रों पर उनके उपयोग की तकनीक सिखाई गई। समापन अवसर पर 30 प्रतिभागी महिलाओं को आईसीएआर-सीवा से प्राप्त कृषि कार्य हेतु आवश्यक सामग्री जैसे बाल्टी, खुर्पी, दरांती, फावड़ा, स्प्रेयर पंप, पाइप एवं क्रेट आदि वितरित किए गए।
इस तीन-दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन डा. मनीषा गहलौत, इकाई समन्वयक; डा. अनिल कुमार वैज्ञानिक; अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना-कृषिरत महिलाएं एवं उनकी शोध टीम डा. बीनू सिंह, डा. कल्पलता पंत एवं ग्राम प्रधान श्रीमती वर्षा चन्याल के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।
