- अंतर-राज्य युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के चौथे दिन का सफल समापन
- कार्यक्रम में प्रतिभागियों को उत्तराखंड की सांस्कृतिक गहराइयों से परिचित कराया गया
मेरा युवा भारत, नैनीताल (युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा 9 से 13 फरवरी 2026 तक हर्मिटेज, यूजीसी–एमएमटीटीसी, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल में आयोजित अंतर-राज्य युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस की गतिविधियाँ अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक रहीं। इस कार्यक्रम में बिहार राज्य के पटना, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, वैशाली एवं समस्तीपुर जिलों से आए कुल 37 युवा प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।
चतुर्थ दिवस की शुरुआत प्रातःकालीन प्रभात फेरी से हुई, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। प्रभात फेरी के माध्यम से युवाओं में अनुशासन, सामूहिकता तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। इसके उपरांत प्रतिभागियों ने दिनभर की गतिविधियों के लिए ऊर्जा और सकारात्मकता का अनुभव किया।

इसके बाद भाषा शिक्षण सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें प्रशिक्षक पुष्कर दानू के साथ मेरा युवा भारत, नैनीताल के सक्रिय स्वयंसेवक संजय बिष्ट एवं श्री अजय कोहली ने युवाओं का मार्गदर्शन किया। इस सत्र का उद्देश्य विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच भाषाई समझ को बढ़ाना, संवाद कौशल विकसित करना तथा आपसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सशक्त बनाना था। प्रतिभागियों ने इस सत्र को अत्यंत रोचक एवं उपयोगी बताया।
दोपहर सत्र में यूजीसी–एमएमटीटीसी, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के प्राचार्य प्रो. रीतेश साह द्वारा उत्तराखंड की संस्कृति पर एक जानकारीपूर्ण व्याख्यान दिया गया। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति को ऐतिहासिक एवं भौगोलिक दृष्टिकोण से समझाते हुए बताया कि किस प्रकार यहाँ की भौगोलिक परिस्थितियाँ, पर्वतीय जीवनशैली और इतिहास ने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आकार दिया है। इस सत्र ने प्रतिभागियों को उत्तराखंड की सांस्कृतिक गहराइयों से परिचित कराया।
इसके पश्चात आरोही संस्था के कार्यकारी निदेशक डॉ. पंकज तिवारी एवं समीरन त्रिपाठी द्वारा आरोही संस्था एवं इसके ग्रामीण विकास तथा महिला स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार संस्था ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका, शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। यह सत्र युवाओं के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।
दिन के अंतिम सत्र में डीएसबी परिसर, नैनीताल के एनसीसी कैडेट्स के साथ एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र के माध्यम से बिहार के युवाओं को पहाड़ी क्षेत्रों के जीवन, चुनौतियों एवं अनुशासित जीवनशैली की जानकारी प्राप्त हुई। इसके उपरांत एनसीसी कैडेट्स द्वारा युवाओं को उत्तराखंड का पारंपरिक लोकनृत्य भी सिखाया गया, जिसे सभी प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह से सीखा।
सायंकालीन सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों के युवाओं ने अपनी-अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं एवं लोककला को समझने का अवसर मिला, जिससे “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना और अधिक सशक्त हुई। चतुर्थ दिवस की सभी गतिविधियाँ युवाओं के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा देने वाली रहीं।
