- गैरसैंण की हुंकार से हिला बागेश्वर, पूर्व IAS विनोद रतूड़ी ने नेताओं को घेरा, बोले—अब होगा सीधा हिसाब
बागेश्वर:
उत्तराखंड की स्थाई राजधानी गैरसैंण के मुद्दे को लेकर चल रहा जन आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। स्थाई राजधानी गैरसैंण संघर्ष समिति के बैनर तले बागेश्वर में हुए विशाल प्रदर्शन ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। इस आंदोलन को धार देने पहुंचे पूर्व IAS अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी ने मंच से सत्ता और विपक्ष दोनों पर तीखा हमला बोलते हुए साफ कहा कि अब यह लड़ाई सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कोर्ट से लेकर गांव-गांव तक लड़ी जाएगी।
प्रदर्शन के दौरान जब केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का काफिला वहां से गुजरा, तो आंदोलनकारियों का आक्रोश फूट पड़ा। “गैरसैंण हमारी स्थाई राजधानी हो” और “अंकिता भंडारी को न्याय दो” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
सभा को संबोधित करते हुए विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि सत्ता और विपक्ष दोनों ने गैरसैंण के मुद्दे पर जनता को सिर्फ गुमराह किया है। उन्होंने उत्तराखंड क्रांति दल पर भी निशाना साधते हुए सवाल किया कि “राजधानी का मुद्दा आपकी प्राथमिकता सूची में दसवें नंबर पर क्यों है? क्या यह राज्य के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ नहीं है?”
गौरतलब है कि IAS रहते हुए भी गैरसैंण के लिए RTI दाखिल करने वाले रतूड़ी ने अब ऐलान किया है कि वे जल्द ही हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और सांसदों-विधायकों से इस मुद्दे पर सीधा जवाब मांगेंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि अब किसी के भरोसे बैठने का समय खत्म हो चुका है और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक भी लड़ाई लड़ी जाएगी।
आंदोलन को और मजबूती देने के लिए भुवन कठैत ने बागेश्वर तक कठिन पैदल यात्रा कर आंदोलनकारियों में नया जोश भर दिया। इस दौरान नारायण सिंह बिष्ट, पी.सी. तिवारी, इन्द्रेश मैखुरी, चारू तिवारी, अंकुर उपाध्याय, भास्कर, भंडारी समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं ने हुंकार भरते हुए कहा कि जब तक गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थाई राजधानी घोषित नहीं किया जाता, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।
सभा में साफ संदेश दिया गया कि अब गैरसैंण की लड़ाई आर-पार की होगी और इसका फैसला सड़क से लेकर अदालत तक कराया जाएगा।

