पंतनगर विश्वविद्यालय में ICAR फल अनुसंधान परियोजना की 13वीं समूह चर्चा का भव्य उद्घाटन

गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के डा. रतन सिंह सभागार में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा संचालित ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटर रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन फ्रूट्स की 13वीं समूह चर्चा के उद्घाटन सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर के 19 आईसीएआर संस्थानों एवं 22 राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों, प्रतिनिधियों तथा छः राज्यों से आए प्रगतिशील किसान सहभागिता कर रहें है। इस कार्यक्रम में विभिन्न फलों के परियोजना समन्वयक प्रतिभाग कर रहें है। इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के प्रतिनिधि डा. ए.के. कर्नाटक पूर्व कुलपति, एमपीयूएटी, उदयपुर एवं यूयूएचएफ, भरसार तथा विष्वविद्यालय के अधिश्ठाता एवं निदेषकगण उपस्थित थे। यह समूह चर्चा फल अनुसंधान के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग, ज्ञान-विनिमय एवं नवाचार को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डा.) मनमोहन सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

उनके साथ डा. प्रकाश पाटिल, राष्ट्रीय आयोजन सचिव एवं परियोजना समन्वयक, फल, आईसीएआर-आईआईएचआर, बेंगलुरु; डा. दिलीप घोष, निदेशक, आईसीएआर-सीसीआरआई, नागपुर; डा. जगदीश राणे, निदेशक, आईसीएआर-सीआईएएच, बीकानेर; डा. एस.के. वर्मा, निदेशक, शोध; डा. सुभाष चंद्र, अधिष्ठाता कृषि एवं डा. ए.के. सिंह, संयुक्त निदेशक उद्यान मंचासीन रहे।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपने संबोधन में कुलपति प्रोफेसर (डा.) मनमोहन सिंह चौहान ने अनुसंधान परिणामों के प्रभावी प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि शोध का सीधा लाभ किसानों तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने मांग-आधारित अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों के उपयोग एवं कृषि को उद्योग के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उत्तराखंड के बेडू एवं काफल फलों को उन्नत किये जाने का सुझाव दिया जिससे कि उनके आकार एवं वजन में वृद्धि हो। साथ ही अन्य स्थानीय फलों को भी शोध के माध्यम से उन्नत किये जाने का सुझाव दिया।

विश्वविद्यालय के उद्यान अनुसंधान केन्द्र, पत्थरचट्टा में नए फलों क्रमशः ड्रैगन फ्रूट, अंगूर, एवाकेडो आदि के रोपण पर भी प्रकाश डाला। उनके द्वारा स्थानीय प्रजातियों को एनबीपीजीएआर, नई दिल्ली में पंजीकृत करने का सुझाव दिया गया। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु से पहाड़ी क्षेत्र अधिक प्रभावित होते हैं। अतः उस परिप्रेक्ष्य में षोध कार्य किये जाने की आवष्यकता है तथा फलों मंे तुड़ाई उपरांत होने वाले नुकसान को कम करने और उनके सेल्फ लाईफ को बढ़ाने हेतु षोध कार्य करने पर बल दिया।आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (फल एवं बागवानी फसलें) डा. वी.बी. पटेल द्वारा वर्चुअल माध्यम से सभा को संबोधित किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु में बदलाव एक बहुत बड़ा मुद्दा है और इस परिप्रेक्ष्य में हमें विभिन्न फलों में षोध कार्य को आगे बढ़ाना है। फल की तुड़ाई के उपरांत होने वाले नुकसान को कम करना है तथा उपभोगकर्ता के मांग के अनुसार अच्छी गुणवत्ता एवं पोशक तत्वयुक्त फलों की नई किस्मों को विकसित करना है। उन्होंने कहा कि विभिन्न फलों में प्रति हैक्टेयर उत्पादकता को बढ़ाने की भी आवष्यकता है।

कीवी एक महत्वपूर्ण फल है जिसकी औसत उत्पादकता भारत में 2-3 मीट्रिक टन प्रति हैक्टेयर है जबकि न्यूजीलैंड में 38-40 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। उन्होंने फल की प्रजातियों को पौध संरक्षण प्रजाति एवं कृषक संरक्षण प्राधिकरण, भारत सरकार में पंजीकृत करने का भी सुझाव दिया।डा. दिलीप घोष, निदेशक, आईसीएआर-सीसीआरआई, नागपुर द्वारा भी बदलते मौसम के कारण उत्पन्न होने वाले नये रोग एवं कीट के प्रति प्रतिरोधी किस्मों के विकास पर बल दिया तथा उनके द्वारा नींबू में विभिन्न स्तर पर किये जा रहे षोध एवं षोध उपलब्धियों पर प्रकाष डाला गया तथा एक्रीप केन्द्रों पर 3-पी मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया गया। डा. जगदीश राणे, निदेशक, आईसीएआर-सीआईएएच, बीकानेर ने अपने संबोधन में आकड़ों के ऊपर बल देते हुए षोध उपलब्धियों के लिए जाने वाले निर्णयों के लिए आकड़ों के महत्व पर प्रकाष डाला और भविश्य में उपयोग किये जाने उपकरणों को ए.आई. एप्लिकेषन के साथ जोड़ने के लिए कहा।

इस अवसर पर एक्रीप के परियोजना समन्वयक (फल) डा. प्रकाश पाटिल द्वारा देश के कुल 49 केन्द्रों पर विभिन्न फलों में किये जा रहे शोध के ऊपर विस्तृत विवरण दिया गया और भविष्य के चुनौतियों के मध्य रणनीति अपनाकर फलों की पैदावार में वृद्धि एवं गुणवत्ता के लिए सुझाव दिया। कार्यक्रम में अधिष्ठाता, कृषि डा. सुभाष चंद्र ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। प्रारम्भ में निदेशक शोध डा. एस.के. वर्मा द्वारा स्वागत भाशण प्रस्तुत करते हुए विष्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाष डाला गया और उत्तराखण्ड के पहाड़ के फल वेडू, काफल एवं अन्य माइनर फलों पर षोध किये जाने की आवष्यकता पर प्रकाष डाला।

कार्यक्रम के दौरान ‘आम, अमरूद एवं लीची की उत्पादन वृद्धि हेतु प्रौद्योगिकी टोकरी’ नामक प्रकाशन का विमोचन किया गया। साथ ही छः राज्यों से आए प्रगतिशील किसानों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संयुक्त निदेशक, उद्यान एवं आयोजन सचिव डा. ए.के. सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

Jago Pahad Desk

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