पंतनगर। विश्वविद्यालय के 119वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी के दूसरे दिन मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री, उत्तराखंड पुष्कर सिंह धामी द्वारा मेले का फीता काटकर उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर विष्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान, विधायक, किच्छा तिलक राज बहेड़, पूर्व दर्जा राज्य मंत्री राजेष कुमार, विष्वविद्यालय प्रबंध परिषद के सदस्य एवं पूर्व विधायक राजेष शुक्ला, महापौर नगरनिगम, रूद्रपुर विकास शर्मा, जिलाध्यक्ष कमल जिन्दल, जिला पंचायल अध्यक्ष अजय मौर्या, अध्यक्ष मण्डी परिषद अनिल डब्बू एवं निदेषक प्रसार एवं षिक्षा डा. जितेन्द्र क्वात्रा मंचासीन थे। मेले के उद्घाटन के पश्चात् कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान द्वारा पुष्कर सिंह धामी को मेले में लगी उद्यान प्रदर्षनी तथा विष्वविद्यालय के महाविद्यालयों द्वारा लगायी गयी विभिन्न प्रदर्षनियों के स्टालों का अवलोकन कराया गया। तदोपरांत माननीय मुख्यमंत्री जी ने गांधी पार्क में गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनको श्रद्धाजंलि दी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि के क्षेत्र में होने वाले नवाचार, नए अनुसंधान और नई जानकारियो से किसानों को परिचित होने का अवसर ऐसे मेले प्रदान करते हैं क्योंकि किसान मेले में एक ही स्थान पर किसानों को विभिन्न कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, आधुनिक यंत्रों और वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी प्राप्त होती है। मैं आशा हूँ कि ये सभी जानकारियाँ निश्चित रूप से किसानों के लिए लाभकारी और अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी।

उन्होंने कहा कि किसान देश के अन्नदाता ही नहीं हैं, बल्कि देश के वीर सैनिकों के समान हैं और हमारे देश और समाज के असली नायक हैं, जो लगातार अपना खून-पसीना बहाकर देशवासियों को अन्न उपलब्ध कराने का कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का जो संकल्प माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने लिया है, उसमें किसान की बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है। आज भारत का किसान पूरे आत्मविष्वास और ताकत के साथ अपना कार्य कर रहा है और किसानों की इसी ताकत से भारत निरंतर आगे बढ़ रहा है क्योंकि जब खेत समृद्ध होता है तो गाँव समृद्ध होता है, और जब गाँव समृद्ध होते हैं तो देश स्वतः ही समृद्धि की ओर अग्रसर हो जाता है। यही कारण है कि माननीय प्रधानमंत्री जी गाँव, गरीब और किसान को देश की आत्मा मानते हुए अन्नदाताओं की आय बढ़ाने तथा उनके जीवन स्तर को ऊँचा उठाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आज देश भर के लगभग 10 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। असम से माननीय प्रधानमंत्री जी ने देश के किसानों के खातों में किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी करते हुए अन्नदाताओं को एक बड़ी सौगात दी है।उत्तराखण्ड राज्य को भी पच्चीस करोड़ रुपये की घोषणा दो दिन पहले ही जारी की गई।
माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में जहाँ एक ओर सभी प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि करके किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य प्रदान किया जा रहा है, वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, खराब मौसम और फसल रोगों से होने वाले नुकसान के लिए एक सुरक्षा कवच भी प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के माध्यम से किसानों की मिट्टी की वैज्ञानिक तरीके से जांच कर उन्हें पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी की उर्वरता के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इसी प्रकार प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के माध्यम से किसानों के लिए पेंशन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड योजना की सीमा को तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पाँच लाख रुपये कर दिया गया है, जिससे किसानों को खेती के लिए अधिक वित्तीय सहायता मिल सके। इसके अतिरिक्त ड्रिप (बूंद-बूंद) सिंचाई योजना, डिजिटल कृषि मिशन और अन्य अनेक पहलों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एक ओर जहाँ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिक कृषि तकनीकों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, वहीं कृषि क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगभग 14 हजार करोड़ रुपये की लागत से सात नई परियोजनाओं की शुरुआत भी की गई है। माननीय प्रधानमंत्री जी के कुशल नेतृत्व और उनकी प्रेरणा से हमारी राज्य सरकार भी किसानों के कल्याण और उनकी समृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रही है। जहाँ एक ओर राज्य में किसानों को तीन लाख रुपये तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं कृषि उपकरण खरीदने के लिए फार्म मशीनरी बैंक योजना के माध्यम से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही किसानों के हित में नहरों से सिंचाई को पूरी तरह से मुक्त (निःशुल्क) करने का कार्य भी किया गया है।

किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पॉलीहाउस निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। मुझे यह बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि इसके अंतर्गत अब तक राज्य में लगभग 115 करोड़ रुपये की सहायता से करीब 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा गेहूँ खरीद पर किसानों को 20 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है तथा गन्ने के मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि भी की गई है। उसके अनुसार वहाँ की परिस्थितियों को देखते हुए नीतियाँ भी बनानी पड़ती हैं।
पहाड़ी क्षेत्रों में बागवानी खेती को बढ़ावा देने के लिए लगभग एक हजार करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखंड क्लाइमेट रेसिलिएंट हॉर्टिकल्चर फार्मिंग प्रोजेक्ट भी प्रारम्भ किया गया है। इसी प्रकार हमारी सरकार ने फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए लगभग 1200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब नीति, कीवी मिशन तथा अन्य बागवानी योजनाएँ भी लागू की हैं। आज रुद्रपुर, सितारगंज, बाजपुर और आस-पास के क्षेत्र ड्रैगन फ्रूट उत्पादन का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ के ड्रैगन फ्रूट की विभिन्न स्थानों पर अच्छी मांग हो रही है और इसकी मार्केट तेजी से बढ़ रही है। कृषकों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसी अनेक महत्वपूर्ण योजनाएँ लागू की गई हैं। इन नीतियों के अंतर्गत बागवानी को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश में किसानों की उपज के संरक्षण और बेहतर विपणन के लिए कोल्ड चेन, कोल्ड स्टोरेज, सीए स्टोरेज, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों तथा पैक हाउस भी स्थापित किए जा रहे हैं। यह सभी अन्नदाताओं की मेहनत और हमारे सतत प्रयासों का परिणाम है कि आज राज्य में फल उत्पादन के साथ-साथ मशरूम उत्पादन में भी उत्तराखंड देश में पांचवें स्थान पर पहुँच चुका है। राज्य गठन के समय जहाँ मषरुम का उत्पादन मात्र 500 मीट्रिक टन था, वहीं आज बढ़कर 27 हजार मीट्रिक टन से अधिक हो गया है।

इसी प्रकार शहद उत्पादन में भी हमारा राज्य देश में आठवें स्थान पर पहुँच चुका है और आज राज्य में 3300 मीट्रिक टन से अधिक शहद का उत्पादन किया जा रहा है। किसान मेले में शहद और मधुमक्खी पालन से जुड़े कई अच्छे स्टॉल भी लगे हुए हैं जिसे किसान अवष्य देखे क्योंकि हमारे राज्य में मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन की अपार संभावनाएँ हैं और इसमें बहुत बड़ा संभावित विकास का क्षेत्र मौजूद है।
बागवानी के समग्र विकास के लिए जापान के सहयोग से चार केंद्रों में लगभग 526 करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखंड हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट भी संचालित किया जा रहा है। इसी प्रकार सुगंधित एवं औषधीय एवं संगंध फसलों को बढ़ावा देने के लिए हमने “महक क्रांति नीति 2026 से 2036” तक लागू की है। अगले दस वर्षों में इस योजना के माध्यम से सुगंधित खेती को बढ़ावा दिया जाएगा और हजारों हेक्टेयर भूमि पर इस प्रकार की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही हम सुगंधित उत्पादों और पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए काशीपुर में 40 एकड़ भूमि पर लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से एरोमा पार्क भी विकसित कर रहे हैं। “हाउस ऑफ हिमालय” ब्रांड उत्तराखण्ड राज्य का एक एकीकृत (इंटीग्रेटेड) ब्रांड बन चुका है। इसके अंतर्गत महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पाद, छोटे उद्योगों के उत्पाद, स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पाद तथा स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। हमारे इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि किसानों की आय बढ़ाने के क्षेत्र में भी हमारे राज्य को देशभर में सराहना मिली है और इस दिशा में हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
उत्तराखण्ड राज्य में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान अनेक दुर्गम क्षेत्रों में तैनात रहते हैं। उत्तराखण्ड राज्य का आईटीबीपी के साथ एमओयू हस्ताक्षर किया गया है। इन क्षेत्रों में तैनात आईटीबीपी के जवानों के लिए हम स्थानीय किसानों से सीधे जीवित भेड़-बकरी, कुक्कुट, मछली, फल और सब्जियाँ उपलब्ध करा रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने लगभग तीन करोड़ रुपये से अधिक की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त हमारे बजट में दीन दयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लिए लगभग 42 करोड़ रुपये तथा “हाउस ऑफ हिमालय” ब्रांड के लिए 5 करोड़ रुपये का भी प्रावधान किया गया है। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में पिछले लगभग 11 वर्षों में किसानों के कल्याण के लिए जितना कार्य हुआ है, उतना देश की आज़ादी के बाद शायद ही कभी हुआ हो। प्रधानमंत्री जी के अथक प्रयासों से किसानों और गरीबों से जुड़ी हर योजना का लाभ सीधे उनके बैंक खातों में पहुँचता है। अब कोई भी बिचौलिया उस पैसे पर हाथ नहीं डाल सकता। मुख्यमंत्री ने विष्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत बीजों एवं तकनीकों की प्रषंसा करते हुए किसानों से नई कृषि तकनीकों को अपनाने तथा विष्वविद्यालय द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और संगोष्ठियों में अधिक से अधिक भागीदारी करने का आह्वान किया, ताकि वे आधुनिक खेती के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकें।

कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि वर्ष में दो बार किसान मेला आयोजित किया जाता है जिससे किसान इस मेले से नवीन तकनीकी जानकारी प्राप्त करते है। उन्होंने बताया इस मेले में यह पहली बार है एक विषेष स्टाल नवाचार के उपर लगाया गया है जहां सभी आगंतुक विष्वविद्यालय द्वारा पिछले दो-तीन वर्षों में विकसित नई तकनीकों को एक ही स्थान पर देख कर जानकारी प्राप्त कर सकते है। मेले में किसानों हेतु किसान गोष्ठी का भी आयोजन किया गया है तथा किसानों की समस्याओं को सुनने के लिए वैज्ञानिक मंच बनाया गया है जिससे कि उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण हो सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देष में खाद्यान्न का उत्पादन 35 करोड़ 70 लाख टन मैट्रिक टन है, जिसमें पिछले 10 वर्षों में 30 प्रतिषत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि 2026 में 2048 मिलियन टन दूध का उत्पादन हो रहा है। उन्होंने कहा कि बागवानी के क्षेत्र में 4 से 5 लाख किसान जुडे है। उन्होंने इस मेले की थीम सषक्त महिला-समृद्ध खेती पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं हेतु विभिन्न शोध कार्य किये जा रहें है और विष्वविद्यालय द्वारा महिलाओं को शहद, मषरूम, दूग्ध से बने उत्पाद, बागवानी एवं घरेलू उत्पाद बनाने का प्रषिक्षण दिया जा रहा है जिससे महिला कृषक आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने कहा कि किसान मेले में लगभग 350 से अधिक बड़े एवं छोटे स्टाल लगाये गये है।
कार्यक्रम के अंत में विष्वविद्यालय के निदेषक प्रसार षिक्षा डा. जितेन्द्र क्वात्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों द्वारा विभिन्न कृषि साहित्यों का विमोचन किया गया तथा उत्तराखण्ड के विभिन्न जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से चयनित 9 प्रगतिषील कृषकों एवं 2 कृशि उद्यमियों को सम्मानित किया गया जिनमें विकासखण्ड चम्पावत से चन्द्र षेखर तिवारी; रुड़की से उज्जवल सैनी; कनालीछिना से संुंदर सिंह बिश्ट; देवाल से मोहन सिंह बिश्ट; भीमताल से श्रीमती दीपा देवी; चकराता से डा. पूजा गौड़; चौखुटिया से प्रकाष चंद उपाध्याय; गदरपुर से उमा पानू और ऊखीमठ से अनिता देवी तथा कृशि उद्यमी सम्मान डोईवाला से कृश्णकांत और काषाीपुर से षुभम बडोला को दिया गया। गांधी हाल में कुलसचिव, निदेषक प्रषासन एवं अनुश्रवण, अधिष्ठाता, निदेषकगण, संकाय सदस्य, किसान, विद्यार्थी, वैज्ञानिक, षिक्षक, अधिकारी, विभिन्न कम्पनियों के प्रतिनिधि एवं अन्य आगंतुक उपस्थित थे। मेले में उत्तराखण्ड के विभिन्न जनपदों के साथ-साथ अन्य प्रदेषों तथा नेपाल के किसान भी उपस्थित थे।




