अनुसूचित जाति उप योजना के अंतर्गत किसानों को निःशुल्क कृषि सामग्री का वितरण एवं प्रशिक्षण आयोजित


पंतनगर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल हरियाणा के सौजन्य से पंतनगर विश्वविद्यालय में संचालित अखिल भारतीय समन्वित गेहूँ एवं जौ अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति उप योजना (एस.सी.एस.पी.) के किसानों को कृषि के क्षेत्र में सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से निःशुल्क कृषि सामग्री वितरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दिनांक 20-28 फरवरी, 2026 को जनपद नैनीताल के सूरिया ग्राम, मझेड़ा एवं जनपद उधमसिंह नगर के ढकिया कलां ग्राम, काशीपुर, जसपुर एवं कोटाबाग के कृषि ग्रामीणों के लिए आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 300 से ज्यादा लाभार्थी किसान उपस्थित रहे।


अनुसूचित जाति उप योजना (एस.सी.एस.पी.) के परियोजना अधिकारी डा. जे.पी. जायसवाल ने बताया कि इस वितरण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना, उत्पादन लागत को कम करना तथा फसल उत्पादकता में वृद्धि करना हैकार्यक्र के अंतर्गत किसानों को खरपतवारनाशी, नैनो यूरिया (तरल उर्वरक), दरांती, खुरपी तथा रबी फसलों की उन्नत खेती संबंधी पुस्तिकाएं निशुल्क प्रदान की गईं। इन सामग्रियों के माध्यम से किसानों को खरपतवार नियंत्रण, संतुलित पोषण प्रबंधन तथा खेत की नियमित देख-रेख में सुविधा प्राप्त होगी।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को रबी फसलों में समय पर बुवाई, उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, कीट एवं खरपतवार नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों तथा आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि नैनो यूरिया के प्रयोग से फसल को त्वरित पोषण मिलता है, जिससे उत्पादन में वृद्धि संभव है। वहीं खरपतवारनाशी के उचित उपयोग से खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है, जिससे फसल को पोषक तत्वों की प्रतिस्पर्धा कम होती है।


इस अवसर पर प्राध्यापक डा. राजीव कुमार, डा. अमित केसरवानी, डा. स्वाति, डा. अनिल कुमार, राम प्रवेश राजभर एवं पुष्पेंद्र मिश्रा द्वारा किसानों से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं को सुना गया तथा वैज्ञानिक समाधान किया गया। अधिकारियों ने कहा कि सरकार एवं कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना और उन्हें नवीन तकनीकों से अवगत कराना है।


कार्यक्रम के दौरान किसानों में उत्साह एवं जागरूकता देखने को मिली। लाभार्थी किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएं विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती हैं। निःशुल्क उपलब्ध कराई गई सामग्री से उन्हें आर्थिक सहायता के साथ-साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ है। यह कार्यक्रम अनुसूचित जाति किसानों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा और क्षेत्र में कृषि विकास को नई दिशा प्रदान करेगा।

कार्यक्रम में कृषकों को जानकारी देते वैज्ञानिक

औद्यानिकी एवं औषधीय पौधों की खेती पर दो-दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्


पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में कृषि महाविद्यालय के कृषि संचार विभाग द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से वित्तपोषित जनजातीय उप योजना के अंतर्गत ‘औद्यानिकी एवं औषधीय पौधों की खेती को आजीविका संवर्धन हेतु प्रोत्साहन’ विषय पर दो-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में विकासखंड गदरपुर के ग्राम कुल्हा की अनुसूचित जनजाति की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।


कार्यक्रम में निदेशक संचार डा. जय प्रकाश जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. ए.एस. जीना, प्रभारी समेटी डा. बी.डी. सिंह तथा प्रोफेसर डा. निर्मला भट्ट उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन जनजातीय उप योजना की प्रधान अन्वेषक डा. अर्पिता शर्मा कांडपाल के निर्देशन में किया गया।


अपने संबोधन में डा. जय प्रकाश जायसवाल ने कहा कि औद्यानिकी एवं औषधीय फसलों की खेती ग्रामीण क्षेत्रों में आय वृद्धि और स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बन सकती है। डा. ए.एस. जीना ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला बताते हुए आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। डा. बी.डी. सिंह ने बाजार उन्मुख उत्पादन एवं वैज्ञानिक खेती की आवश्यकता पर बल दिया। डा. निर्मला भट्ट ने औषधीय पौधों की उपयोगिता, मूल्य संवर्धन एवं विपणन संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी। वहीं डा. अर्पिता शर्मा कांडपाल ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य जनजातीय महिलाओं को तकनीकी ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान कर उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।


प्रशिक्षण के दौरान सैद्धान्तिक व्याख्यानों के साथ व्यावहारिक प्रदर्शन भी आयोजित किए गए, जिनमें नर्सरी प्रबंधन, पौधारोपण, जैविक खेती, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा कटाई उपरांत प्रबंधन से संबंधित जानकारी प्रदान की गई एवं उपयोगी सामग्री का वितरण परियोजना मद से किया गया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें नई तकनीकी जानकारी एवं आत्मविश्वास प्राप्त हुआ है। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। यह कार्यक्रम जनजातीय महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

प्रशिक्षण में अनुसूचित जनजाति की कृषक महिलाओं के साथ अधिकारीगण

Jago Pahad Desk

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