देहरादून में पेयजल निगम घोटाले का खुलासा: 2660 करोड़ की अनियमितताओं पर अधिवक्ता नेगी का बड़ा आरोप
सीएजी रिपोर्ट के आधार पर 2660 करोड़ की गड़बड़ी उजागर
आरटीआई एक्टिविस्ट एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने पत्रकार वार्ता में उत्तराखंड पेयजल निगम में 2016 से मई 2024 तक कुल 2660 करोड़ 27 लाख रुपये की अनियमितताओं का गंभीर खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह तथ्य उन्हें सीएजी रिपोर्ट के आधार पर आरटीआई के माध्यम से प्राप्त हुए हैं।
कई वर्षों तक आडिट न होने पर उठाए गंभीर सवाल
नेगी ने कहा कि वर्ष 2017-18 और 2018-19 में निगम का आडिट तक नहीं हुआ। यह न सिर्फ वित्तीय नियमों का उल्लंघन है बल्कि भ्रष्टाचार को छिपाने की “संगठित रणनीति” का संकेत भी है। उन्होंने बताया कि कई वर्षों तक आडिट न करवाना अपने आप में बड़े घोटाले का प्रमाण है।
वर्षवार अनियमितताओं का विवरण सार्वजनिक
अधिवक्ता नेगी द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार—
- 2016-17 : 92.41 करोड़
- 2019-20 : 656.05 करोड़
- 2020-21 : 829.90 करोड़
- 2021-22 : 43.48 करोड़
- 2022-23 : 96.99 करोड़
- 2023-24 : 803 करोड़
- 2024-25 (मई तक) : 38.41 करोड़
कोरोना काल में भी 829 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप
नेगी ने सबसे गंभीर आरोप यह लगाया कि कोरोना महामारी के दौरान, जब राज्य स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा था, पेयजल निगम में 829.90 करोड़ रुपये का वित्तीय गोलमाल किया गया। उन्होंने इसे “मानवीय संवेदनहीनता का सबसे बड़ा उदाहरण” बताया।
ठेकेदारों पर जीएसटी न जमा करने और बिना कार्य भुगतान के आरोप
अधिवक्ता नेगी ने कहा कि कई ठेकेदारों ने जीएसटी तक जमा नहीं किया, जबकि विभाग ने न तो नोटिस जारी किया और न ही कार्रवाई की। कई मामलों में ठेकेदारों को बिना कार्य पूर्ण किए और बिना बैंक गारंटी लिए ही भुगतान कर दिया गया। निर्माण कार्यों में रॉयल्टी भी नहीं ली गई और कई निर्माण निम्न गुणवत्ता के पाए गए।
“यह सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध”
नेगी ने कहा कि पूरा मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत गंभीर अपराध बनता है। यह केवल वित्तीय गलती नहीं बल्कि “संगठित आर्थिक अपराध” है जिसमें अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत साफ दिखाई देती है।
सीएजी रिपोर्ट विधानसभा में पेश न होने पर तीखी प्रतिक्रिया
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि करोड़ों की गड़बड़ी वाली यह सीएजी रिपोर्ट अब तक विधानसभा में प्रस्तुत नहीं की गई। रिपोर्ट को दबाना लोकतांत्रिक परंपरा और संवैधानिक सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है।
मुख्यमंत्री को शिकायत, SIT/CBI जांच की मांग
अधिवक्ता नेगी ने पूरी रिपोर्ट की प्रति मुख्यमंत्री को भेजते हुए दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि 2660 करोड़ की अनियमितता के मामले में सामान्य विभागीय जांच पर्याप्त नहीं होगी, इसलिए SIT, विजिलेंस या CBI से जांच की आवश्यकता है।
“यह राज्य की प्रशासनिक आत्मा पर चोट” – नेगी
अंत में नेगी ने कहा कि यह भ्रष्टाचार सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का दोहन है। यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध है, तो इस प्रकरण में तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।

