उत्तराखंड की पारंपरिक बागवानी को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित ‘माल्टा महोत्सव-2026’ के आंकड़े राज्य की ग्रामीण आर्थिकी में एक बड़ी उछाल का संकेत दे रहे हैं। महोत्सव के दौरान जारी रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 12 जिलों से कुल 299.59 क्विंटल नींबू वर्गीय फलों (Citrus Fruits) की उपलब्धता दर्ज की गई, जिसमें से 271.18 क्विंटल फल सीधे संरक्षण इकाइयों (Processing Units) को भेजे गए।
महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में ‘माल्टा मिशन’ की औपचारिक शुरुआत की घोषणा की, जिसका लक्ष्य राज्य को देश की ‘हॉर्टिकल्चर कैपिटल’ बनाना है।
उत्पादन में चमोली और रुद्रप्रयाग सबसे आगे
दस्तावेजों के अनुसार, माल्टा और अन्य नींबू वर्गीय फलों के उत्पादन में चमोली और रुद्रप्रयाग ने बाजी मारी है।
- चमोली: 65 क्विंटल की कुल उपलब्धता के साथ शीर्ष पर रहा। यहाँ अकेले 60 क्विंटल माल्टा का उत्पादन हुआ।
- रुद्रप्रयाग: 63.20 क्विंटल के साथ दूसरे स्थान पर रहा। विशेष बात यह है कि रुद्रप्रयाग ने 10 क्विंटल माल्टा की सीधी फुटकर बिक्री कर बाजार में अपनी मजबूत पकड़ दिखाई।
- पौड़ी: 36.37 क्विंटल के साथ तीसरे स्थान पर रहा, जहाँ माल्टा के साथ-साथ ‘गलगल’ की खेती में भी अच्छी सक्रियता देखी गई।

- गलगल: पूरे प्रदेश में 29.04 क्विंटल गलगल की उपलब्धता रही।
- कागजी नींबू: देहरादून जिले ने इसमें अग्रणी भूमिका निभाते हुए 12.29 क्विंटल का योगदान दिया।
- चकोतरा व किन्नी: उत्तरकाशी और देहरादून जैसे जिलों में इन दुर्लभ प्रजातियों के प्रति भी किसानों का रुझान बढ़ा है।
संरक्षण इकाइयों को मिला बड़ा हिस्सा बताते हैं कि उत्पादित कुल फलों का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 90%) संरक्षण इकाइयों को बिक्री के लिए भेजा गया। यह इस बात का प्रमाण है कि राज्य में अब केवल कच्चे फलों की बिक्री ही नहीं, बल्कि उनके प्रसंस्करण (Processing) जैसे जूस, जैम और स्क्वैश बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि जैसे राज्य में एप्पल और कीवी मिशन सफल रहे हैं, वैसे ही माल्टा मिशन के तहत किसानों को 80% तक की सब्सिडी और तकनीकी सहायता दी जाएगी। उन्होंने घोषणा की कि उत्तराखंड के माल्टा की ब्रांडिंग अब दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में भी की जाएगी ताकि किसानों को बेहतर दाम मिल सकें।

