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पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने 14 प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकी, देशभर के स्टोर से वापस मंगाया सामान

बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने उन 14 उत्पादों की बिक्री रोक दी है जिनके लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। कंपनी ने यह जानकारी दी कि उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने अप्रैल 2024 में इन 14 उत्पादों के लाइसेंस रद्द किए थे और इन उत्पादों को अब देशभर के स्टोर से वापस लिया जा रहा है।

पतंजलि के निर्णय की पृष्ठभूमि

यह निर्णय उस समय लिया गया जब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने पतंजलि के खिलाफ एक याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया था कि पतंजलि कोविड-19 टीकाकरण अभियान और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के खिलाफ दुष्प्रचार कर रही थी। यह मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष आया और न्यायालय ने इस पर गंभीरता से संज्ञान लिया।

प्रभावित उत्पाद और उनके प्रभाव

पतंजलि ने जिन 14 उत्पादों की बिक्री रोकी है, उनमें अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और डायबिटीज के लिए रामदेव की पारंपरिक दवाएं भी शामिल हैं। विशेष रूप से, दिव्य फार्मेसी की जिन दवाओं पर बैन लगाया गया है, उनमें श्वासारि गोल्ड, ब्रोंकोम, श्वासारि प्रवाही, श्वासारि अवलेहा, मुक्ता वटी एक्स्ट्रा पावर, लिपिडोम, लिवामृत एडवांस, लिवोग्रिट, बीबी ग्रिट, मधुग्रिट, मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर और पतंजलि दृष्टि आई ड्रॉप शामिल हैं।

इन दवाओं का व्यापक उपयोग भारत में किया जाता है, और इन पर लगे बैन से हजारों उपभोक्ताओं पर असर पड़ा है। इन उत्पादों को बाजार से वापस लेने के निर्णय ने न केवल उपभोक्ताओं बल्कि पतंजलि के वितरकों और फ्रेंचाइजी स्टोर पर भी गहरा प्रभाव डाला है।

कानूनी और प्रशासनिक कदम

कंपनी ने जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच को सूचित किया कि उसने 5,606 फ्रेंचाइजी स्टोर को इन उत्पादों को वापस लेने का निर्देश दिया है। पतंजलि आयुर्वेद ने यह भी कहा कि उन्होंने मीडिया प्लेटफार्म्स को भी इन 14 उत्पादों के सभी विज्ञापन वापस लेने का निर्देश दिया है।

यह कदम उठाने का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उन उत्पादों के संभावित खतरों से बचाना है जिनके लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं। इसके साथ ही, यह कदम पतंजलि के लिए एक प्रतिष्ठा का मुद्दा भी है क्योंकि कंपनी अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सदैव प्रतिबद्ध रही है।

भविष्य की योजना

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को तय की है। इस दौरान, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर भी सुनवाई होगी जिसमें पतंजलि पर कोविड टीकाकरण अभियान और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया गया है।

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने यह स्पष्ट किया है कि वे उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करेंगे और अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे।

कंपनी का पक्ष

पतंजलि के संस्थापक बाबा रामदेव ने इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी कंपनी हमेशा से भारतीय आयुर्वेदिक परंपराओं और चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पतंजलि आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण अत्यधिक गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए किया जाता है।

बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि कंपनी अपने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति सजग है और इसी कारण उन्होंने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए इन 14 उत्पादों की बिक्री रोक दी है।

निष्कर्ष

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड का यह निर्णय उनके उपभोक्ताओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कदम उपभोक्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के साथ-साथ कंपनी की प्रतिष्ठा को बनाए रखने की दिशा में उठाया गया है।

आगामी सुनवाई में न्यायालय के निर्देशों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आरोपों पर क्या निर्णय आता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। तब तक, पतंजलि अपने उपभोक्ताओं को सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध कराने के प्रति प्रतिबद्ध है।

इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता सुरक्षा और उत्पाद गुणवत्ता के मामले में कड़ी निगरानी और उच्च मानकों का पालन कितना महत्वपूर्ण है। पतंजलि का यह कदम अन्य कंपनियों के लिए भी एक उदाहरण के रूप में काम करेगा, जिससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें।

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