पंतनगर में ICAR की अखिल भारतीय समन्वित पुष्पकृषि अनुसंधान परियोजना की 34वीं वार्षिक समूह बैठक का शुभारंभ

गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीबी पंत विश्वविद्यालय), पंतनगर के कृषि महाविद्यालय में अखिल भारतीय समन्वित पुष्पकृषि अनुसंधान परियोजना (AICRP on Floriculture) की 34वीं वार्षिक समूह बैठक का शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय बैठक का आयोजन 1 से 3 नवंबर, 2026 तक जीबी पंत विश्वविद्यालय, पंतनगर एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DFR), पुणे द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र में जीबी पंत विश्वविद्यालय, पंतनगर के कुलपति डॉ. एस. के. कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहायक महानिदेशक (FVSMAP) डॉ. सुधाकर पांडे विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम में आईसीएआर-राष्ट्रीय आर्किड अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. एस. पी. दास, आईसीएआर-पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे के निदेशक एवं अखिल भारतीय समन्वित पुष्पकृषि अनुसंधान परियोजना के परियोजना समन्वयक डॉ. के. वी. प्रसाद, अनुसंधान निदेशक डॉ. एस. के. वर्मा तथा कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अनिल शुक्ला उपस्थित रहे।

स्वागत संबोधन में डॉ. एस. के. वर्मा ने उत्तराखंड में पुष्पकृषि की अपार संभावनाओं तथा इस क्षेत्र के विकास में विश्वविद्यालय की अनुसंधान एवं तकनीकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने पुष्पकृषि के क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा हासिल की गई प्रमुख अनुसंधान उपलब्धियों की भी जानकारी दी।

डॉ. के. वी. प्रसाद ने अखिल भारतीय समन्वित पुष्पकृषि अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत विगत वर्ष में प्राप्त अनुसंधान उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विभिन्न अनुसंधान कार्यक्रमों की प्रगति तथा परियोजना के तकनीकी कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी।

डॉ. सुधाकर पांडे ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा टिकाऊ आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने में पुष्पकृषि की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक पुष्प उत्पादन को बढ़ावा देने, बाजारों का विस्तार करने, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं के लिए उद्यमिता के अवसर सृजित करने के माध्यम से पुष्पकृषि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में जीबी पंत विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. एस. के. कश्यप ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों, विशेषकर हिमालयी क्षेत्र में पुष्पकृषि की व्यापक अप्रयुक्त संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी उन्नयन एवं उद्यमिता के माध्यम से इस क्षेत्र में उभरते अवसरों की पहचान कर उनका लाभ उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में पंतनगर में पुष्पकृषि के क्षेत्र में अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास एवं प्रसार को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

तीन-दिवसीय बैठक के दौरान अखिल भारतीय समन्वित पुष्पकृषि अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत संचालित अनुसंधान कार्यक्रमों की उपलब्धियों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी तथा गहन विचार-विमर्श के उपरांत आगामी वर्ष के तकनीकी कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा। तकनीकी सत्रों में फसल सुधार, फसल उत्पादन, फसल संरक्षण, कटाई उपरांत प्रबंधन एवं मूल्य संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त, पूर्ण सत्रों में उभरती प्राथमिकताओं एवं भविष्य की अनुसंधान रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

उद्घाटन कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पुष्पकृषि के क्षेत्र में किए गए अनुसंधान कार्यों, तकनीकी विकास एवं प्रमुख उपलब्धियों को संकलित करने वाले 10 तकनीकी बुलेटिनों तथा 02 अखिल भारतीय समन्वित पुष्पकृषि अनुसंधान परियोजना की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट का विमोचन रहा। इस राष्ट्रीय बैठक में देश के विभिन्न भागों से 50 से अधिक प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, प्राध्यापक एवं विद्यार्थी तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

यह बैठक देश में पुष्पकृषि अनुसंधान, विकास एवं उद्यमिता को नई दिशा देने के लिए अनुसंधान की प्रगति की समीक्षा, वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान तथा भविष्य की रणनीतियों के निर्धारण हेतु एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी।

Jago Pahad Desk

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