विश्वविद्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा वित्त पोषित भैंस सुधार पर नैटवर्क परियोजना के अन्तर्गत ग्राम केवलगंज, गदरपुर में कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन डा. डी. कुमार, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, पशु आनुवांषिक एवं प्रजनन विभाग द्वारा किया गया।
कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन परियोजना अधिकारी डा. ए.के. घोष, प्राध्यापक, पशु आनुवांषिक एवं प्रजनन विभाग द्वारा किया गया। डा. ए.के. घोष द्वारा परियोजना के उद्देश्य एवं इससे पशु पालकों को मिलने वाले लाभों पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने परियोजना टीम के सदस्यों का उत्साहवर्धन के साथ-साथ भैंसों के परजीवी रोग व उनकी रोकथाम एवं प्रसवोपरान्त विभिन्न उत्पादन लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु वैज्ञानिक जानकारी दी। डा. डी. कुमार, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, पषु आनुवांषिक एवं प्रजनन विभाग द्वारा भैंस की नस्ल एवं उन्नत भैंस उत्पादन पर प्रकाश डाला गया।

डा. बृजेश सिंह, प्राध्यापक, पषु उत्पादन एवं प्रबंधन विभाग द्वारा भैंस एवं महिष-वत्सों की देखरेख एवं आवास व्यवस्था पर प्रकाश डाला गया। डा. बी. एन. शाही, प्राध्यापक, पशु प्रजनन विभाग द्वारा पशुपालकों को संतुलित एवं पोषक आहार बनाने की विधि बताते हुए पशु पालन के सभी तकनीकी आयामों को अपनाकर उन्नत पशु पालन करने की सलाह दी गई। डा. सुनील कुमार, सहायक प्राध्यापक (पशु प्रसूति विभाग) द्वारा भैंसों में ऋतु के लक्षण, कृत्रिम गर्भाधान का उचित समय तथा जनन तंत्र के प्रमुख रोगों व उनकी रोकथाम की जानकारी दी गई। साथ ही, उन्होंने पशुओं में संक्रमण से बचाव, संक्रमित पशुओं के उपचार हेतु औषधि एवं देखरेख और गाभिन पशुओं की प्रसव-पूर्व व प्रसवोपरांत देखभाल पर प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पशुपालकों का पंजीकरण एवं सामग्री वितरण श्री शैलेन्द्र सिंह एवं श्री गोपाल दत्त पांडे द्वारा किया गया। शिविर में कुल 51 पशु पालकों द्वारा प्रतिभाग किया गया एवं 40 पशुपालकों को मिनरल मिक्चर, कैल्शियम, डीवॉर्मिंग, लिवर टॉनिक, टब, गमबूट, टॉर्च व छाता वितरित किया गया।
